
माँ बापा कै चाव चढो ऐ मै तो देवर
गैलया भेज दई।
रस्ते के मै बुझैन लागी कब आवै तेरा भाई ओ।
छुट्टी काट कै भाई चालया जब मैंने
लेन खंदाया हे।
पिहर कि बैठोड़ी बाहन मै आन सासर डट गई हे।
सास ननद मेरी दौरानी जिठानी सारी तारन आई हे।
उतैर बहु घनघोर लाडली बेटा तै भी प्यारी हे।
दौरानी जिठानी मेरी बोली मारै आजा बांझ लुगाई हे।
बडली ननद मेरी पीढो घालै बैठ भावज तु मेरी हे।
छोटनी ननद मेरी दूध सिलावै आखं नीर तै भर गई हे।
साचम साच बता मेरी ननदी आखया मै नीर क्यू आयो हे।
मेरा बीरा तो रहवै बंगले मै आते ही बांझ बताई हे।
दे दे हो देवर पैंट और बुरसट कर ले मेरी सुनाई हो।
सासरे कि बैठ बाहन मै आ बंगले पै उतरी हे।
जेबा मा तै फोटु काढ के पति शान मिलाई हे।
तु मेरा जीजा मै तेरा साला कर ले मेरी सुनाई हो।
मेरी बेबे तो बिमार पड़ी सै मिलना हो तो मिल ले हो।
बंगले की बैठोड़ी बाहन मै आ दिल्ली मै बोली हे।
पीठ फेर ले ओ राजा ओ तेरी जड़ मै ब्याही खड़ी सै।
साच बतादे रै गौरी रै तु किस विपता मै आई।
साच बता दयु ओ राजा ओ तेरी भावज का बोला पै आई।
नार नहीं रै कोई चाला सै रै भावज के बोल पै आई।
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