ग्यायश माता से मिलन कैसे होए 

खिड़की तो सातो बंद पड़ी।

पहली खिडक़ी खोल के देखी जिसमे घोर अंधेरा।

मैनै न्यु भी ना सोची भगवान दीया तो बाती करती चलु।

ग्यायश माता💐💐💐💐💐💐💐।

दुजी खिडक़ी खोल के देखी उसमै गऊ माए।

मैनै न्यु भी ना सोची मेरे राम गऊ की सेवा करती चलु।

ग्यायश मैया💐💐💐💐💐💐💐💐।

तीजी खिडक़ी खोल के देखी उसमै गंगा मैया।

मैनै न्यु भी ना सोची मेरे राम डुबकी तो लाती चलु।

ग्यायश मैया💐💐💐💐💐💐💐💐।

चौथी खिडक़ी खोल के देखी उसमें कान्हा आप।

मैनै न्यु भी ना सोची मेरे राम चरण इनके धोती चलु।

ग्यायश मैया💐💐💐💐💐💐💐💐।

पाचवीं खिडक़ी खोल के देखी उसमै तुलसा का बिड़ला।

मैनै न्यु भी ना सोची मेरे राम तुलसा का बिड़ला सीचती चलु।

ग्यायश मैया💐💐💐💐💐💐💐💐।

छठी खिडक़ी खोल के देखी उसमै गुरु जी आप।

मैनै न्यु भी ना सोची मेरे राम गुरु का नाम लेती चलु।

ग्यायश मैया💐💐💐💐💐💐💐💐।

सातवीं खिडक़ी खोल के देखी उसमै ग्यायश माता।

मै तो हो गई भव से पार खिडक़ी सातों खुल हे गई।

ग्यायश मैया💐💐💐💐💐💐💐💐।


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