धोलिया कुआँ पै पानी नै गई थी।

राही छोड बटेउ आया।

पानी पयादे छोरी मरु सु पिसायो।

पानी पीले छोरा रोटी खाले।

सिगरेट पिले म्हारी बैठक मै ओ

राही के जाने वाले।

पानी की तो मैंने प्यास नहीं सै।

संग चालो रै नोटंकी मेरै।

संग चालुंगी बटेउ तेरै।

सारा प्रण पुगाइये रै मेरा।

भेली कि ओ मेरी हेली चिणवाइये।

पापड़ का ओ जंगला अलमारी लगाइये।

घी बूरा कि लिपाई करवाइये।

बर्फी का हो वैकै चोबा लगवाइए।

जलेबी कि हो वैकै जाली लगवाइए।

अम्बर की हो मेरी चुन्दड़ी रंगाइए।

तारा तोड़ सितारा लगवाइए।

बिजली का हो वैकै गोटा लगवाइए।

धरती काट मेरो दामन सिमाइए।

काला रै सर्प को नाड़ो डलवाइए।

टरीकोट कि कोटि सिमवाइए।

बिजली खिम हो वैकै बटन लगाइए।

दरियावा मै मेरा बैड घलाइए।

मखमल का हो वैपै गदा गिरवाइए।

अम्बर मै ओ मेरी पींग घलाइए।

काला ओ सर्प कि रस्सी डलवाइए।

पटन गोए की सिढी लगवाइए।

घोरा कना हो मैंने झोटा दिलवाइए।

भाज गयो हे मेरा भाई को सालो।

डट हो बटेउ सुन के जाइये।

जहाज लेए मैंने लेने नै आइये।

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