काशी धाम तै चला शिवशंकर गढ गोकुल 

मे आया हे नन्द बाबा की ऊची अटारी 

आके अलख जगाया हे।

ऊपर तै वा आई नन्दरानी मोतियां का 

थाल सजाया हे ले रै जोगी भिक्षा लेले 

मेरे द्वारे आया हे।

मोती तो मेरे घरा भतेरे मै पेटा भरना 

चाहु हे तेरे लाल का मुखड़ा दिखा दे 

मै दर्शन करना चाहू हे।

तु तो जोगी काला घना सै सर्प पड़ा 

तेरे गल मै हो मेरा लाल तो याना 

घना सै तैनै देख के डर जा हो।

इतना जिक्र सुना जोगी नै गलियारे 

मै आया हे कृष्ण जी कै लगी 

मिलकवा रो रो रुदन मचाया हे।

जाइयो हे सखियों जोगी नै बुलाइयो 

गलियारे मै आया हे मेरे लाल कै लगी 

मिलकवा रो रो रुदन मचाया हे।

जब वो जोगी आया महल मै बालक 

का रोना रुक गया हे उस जोगी नै देख 

के हासैं जानु इसनै कुछ मिल गया हे।

तीन लोक दिखे मुख भीतर भोले नै शीश 

झुकाया हे बाल रुप दिया दिखाई मंद 

मंद मुस्काया हे।

खड़ी खड़ी देखै हे मात यशोदा कुछ ना 

समझ मै आया हे वा के जानै भोली 

गुजरी वो तीन लोक का स्वामी हे।

पिछले जन्म की करी तपस्या तपस्या 

का फल पाया हे अपना फर्ज निभाने 

की खातिर बालक रुप मै आया हे।

माँ बेटा दोनों बडभागी भोले नै शीश 

झुकाया हे अपना फर्ज निभा के भोला 

वापस धाम पै आया हे।


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