
विघ्न हरण मंगल करण श्री गणपत महाराज।
प्रथम निमंत्रण आपको पूरा कीजे काज।
सदा भवानी दिहिने सम्मुख रहे गणेश।
पांच देव रक्षा करे ब्रह्मा विष्णु महेश।
सिंह चढे दुर्गा मिली गरुड़ चढे भगवान।
बैल चढे शिवजी मिले पूर्ण कीजो सब काम।
पाप हमारे करुणा तेरी, दीनों का कोई अंत नहीं।
तीन लोक मे बाबा श्याम जी, तुम जैसा
कोई संत नहीं।
तीन लोक मे लखदातार,तुम जैसा कोई संत नहीं।
आज भी तेरा आसरा कल भी तेरी आस।
किर्तन पूरा हो मेरा ये मांगु वरदान।
मैया के दरबार मे सभी खड़े हाथ जोड़।
देने वाली एक माँ मांगे लाख करोड़।
हे माँ इतना दिजिए जामे कुटुम्ब समाए।
मै भी भुखा ना रहू मेरा साधु ना भुखा जाए।
दुख मे सुमिरन सब करे सुख मे करे ना कोए।
जो सुख मे सुमिरन करे दुख काहे का होए।
राम नाम के आलसी भोजन को होशियार।
तुलसी ऐसे जीव को बार बार धिक्कार।
चिड़ि चोच भर ले गई नदी घटियो ना नीर।
दान दिए धन ना घटे कह गए दास कबीर।
बुरा जो देखन मै चला बुरा ना मिला कोए।
जो दिल देखा आपना मुझसे बुरा ना कोए।
तुम सबकी सुनने वाले हो ,मेरी भी सुनो तो जानु।
कुछ तुम भी मुझको पहचानो, कुछ मै भी तुमको पहचानु।
सुखिया बसे संसार मे दुखिया रहे ना कोए।
ये अभिलाषा हम सब की मेरी मैया पूरी होए।
सियावर राम जय जय राम।
मेरे प्रभु राम जय जय राम।
करो कल्याण जय सियाराम।
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