
खोल दे रै पापी मन ताले को धीरे धीरे
फेर मेरी माला को।
या माला नरसी ने फेरी।
आ गए भात भराने को धीरे धीरे
फेर मेरी माला को।
खोल दे रै…।
या माला मीरा ने फेरी।
आ गए जहर बचाने को धीरे धीरे
फेर मेरी माला को।
खोल दे रै…।
या माला द्रौपदी ने फेरी।
आ गए चीर बढाने को धीरे धीरे
फेर मेरी माला को।
खोल दे रै…।
या माला धन्ना ने फेरी।
आ गए खेत बुआने को धीरे धीरे
फेर मेरी माला को।
खोल दे रै…।
या माला शबरी ने फेरी।
खा गए झुठे बेरो को धीरे धीरे
फेर मेरी माला को।
खोल दे रै…।
या माला अर्जुन ने फेरी।
आ गए ज्ञान सुनाने को धीरे धीरे
फेर मेरी माला को।
खोल दे रै…।
या माला हम सबने फेरी।
आ गए दर्श दिखाने को धीरे धीरे
फेर मेरी माला को।
खोल दे रै…।
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