
धीरे धीरे अखियाँ माँ खोल रही है।
लगता है मैया कुछ बोल रही है।
दुनिया के नजारे तो बेजान लगते।
सुरज चंदा कोडी के समान लगते।
आत्मा मे अमृत घोल रही है।
लगता है मैया कुछ बोल रही है।
धीरे धीरे अखियाँ💐💐💐💐।
आएगी जरुर मैया आज सामने।
अपने भगतो का देखो हाथ थामने।
मिलने का मौका ये टटोल रही है।
लगता है मैया कुछ बोल रही है।
धीरे धीरे अखियाँ💐💐💐💐।
लगे ना नजर मुझे हो रही फिकर।
हीरे और मोती से उतार दु नजर।
क्या करु मेरा ऐसा जोर नहीं है।
लगता है मैया कुछ बोल रही है।
धीरे धीरे अखियाँ💐💐💐💐।
बनवारी ऐसी तकदीर चाहिए।
आत्मा मे माँ की तस्वीर चाहिए।
ऐसा ये असर दिल पे छोड रही है।
लगता है मैया कुछ बोल रही है।
धीरे धीरे अखियाँ💐💐💐💐।
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