
हरि ऐसे बसो मेरे मन मे जैसे तुलसी
बसी आंगन मे।
जैसे फूलों मे खुशबू है रहती।
पर हमको नजर नहीं आती।
ऐसी खुशबू फैला दो मेरे मन मे
कोई देखे ना तुमको हम मे।
हरि ऐसे बसो💐💐💐💐💐💐।
जैसे मेंहदी मे रंग है रहता।
पर हमको नजर नहीं आती।
ऐसे रंग को रंगा दो मेरे मन मे
कोई देखे ना तुमको हम मे।
हरि ऐसे बसो💐💐💐💐💐💐।
जैसे मिश्री मे मीठा है रहता।
जो किसी को नजर नहीं आती।
ऐसा मीठा बना दो मेरे मन मे
कोई देखे ना तुमको हम मे।
हरि ऐसे बसो💐💐💐💐💐💐।
जैसे सागर मे पानी है रहता।
वो किसी को नजर नहीं आती।
ऐसा गहरा बना दो मेरे मन मे
कोई देखे ना तुमको हम मे।
हरि ऐसे बसो💐💐💐💐💐💐।
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