
टुटी छांद टपक रहा पानी आजा मेरे श्याम
गरीबी मै।
जो सुख मिलता भजन करनै मै
वो सुख नहीं अमीरी मै।
टुटी छांद टपक…।
ताते पानी की भरी बाल्टी नहाओ मेरे
श्याम गरीबी मै।
जो सुख मिलता…।टुटी छांद…।
पाट पिताम्बर टसरी की धोती पहरो
श्याम गरीबी मै।
जो सुख मिलता…।टुटी छांद…।
घिस घिस चंदन भरी कटोरी तिलक लगाओ
श्याम गरीबी मै।
जो सुख मिलता…।टुटी छांद…।
शीत राबड़ी का भरा कटोरा पिओ मेरे
श्याम गरीबी मै।
जो सुख मिलता…।टुटी छांद…।
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