
जपते चलो जपते चलो श्री राम जी की
माला जपते चलो।
ये महिमा अहिल्या ने गाई।
पत्थर से नारी बनाई ।
उसको भव से पार लगाया हरी का
नाम जपते चलो।
जपते चलो…।
ये महिमा सबरी ने गाई।
झुठे बेर की टोकरी लाई।
प्रभु रुच रुच भोग लगाया हरी का
नाम जपते चलो।
जपते चलो…।
ये महिमा हनुमत ने गाई।
छवि हृदय प्रभु की बसाई।
उसने सीना फाड़ दिखाया हरी का
नाम जपते चलो।
जपते चलो…।
ये महिमा विभिषण ने गाई।
लंका मे कुटिया बचाई।
लंका का राज है पाया हरी का
नाम जपते चलो।
जपते चलो…।
ये महिमा भरत ने गाई।
भाई की प्रीत निभाई।
उसको प्रभु ने सीने से लगाया हरी का
नाम जपते चलो।
जपते चलो…।
ये तुलसीदास की लिखाई।
सब ऋषियों के मन भाई।
चरणों मे शीश झुकाया हरी का
नाम जपते चलो।
जपते चलो…।
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