भजन के बारे में

सालासर बालाजी के दरबार की चमक का हरियाणवी भजन — लाल लंगोट, लाल पगड़ी, मंगलवार का भारी सत्संग और दूर-दूर से आती संगत देखकर भक्त संसार की सारी बातें भूल जाती है और सवामणी चढ़ाने की मनौती करती है।

कब गाया जाता है: मंगलवार, सालासर यात्रा और हनुमान जयंती पर।

मुखड़ा (Hinglish): Dekh ke chamak Baba tere darbaar ki, bhool gayi oli soli saare sansaar ki.

भजन के बोल

देख के चमक बाबा तेरे दरबार की

भुल गई ओली सोलीसारे संसार की।

लाल लगोंटा बाबा लाल तेरी पगड़ी।

सालासर मै धोक लागै तगड़ी।

कमी नहीं छोडु बाबा तेरे प्रचार की ।

भुल गई …।देख के चमक…।

भुल गई ओली…।

मंगलवार नै सतसंग भारी।

दूर दूर तै आवै नर नारी।

एक नहीं दो नहीं संगत हजार की।

भुल गई …।देख के चमक…।

भुल गई ओली…।

सबकी बिगड़ी आप बनावै।

मेरी भी तो कदे बारी आवै।

मेरै भी तो मन मै आई सवामणी लान की।

भुल गई …।देख के चमक…।

भुल गई ओली…।

सारे गाँव मै थारी हो चर्चा।

हाथों हाथ मिलै सै प्रचा।

मै भी थोड़ी भगती कर लु गदाधारी नाम की।

भुल गई …।देख के चमक…।

भुल गई ओली…।


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