
अहे मैंनै नींद गजब की आई भोले नै आन जगाई।
पहली सेवा गऊ माता की।
अहे उनै सुन्दर बछड़ा जाया वैकी
खावै जगत कमाई।
अहे मैनै नींद…।
दुजी सेवा तुलसा माँ की।
अहे थम दीवा चाशो सारी मिल जांगे
कृष्ण मुरारी।
अहे मैनै नींद …।
तीजी सेवा मात पाता की।
अहे मै पाल पौश के ब्याही मै घर
साजन कै आई।
अहे मैनै नींद …।
चौथी सेवा सास ससुर की।
अहे उके बेटे कै ब्याही आई मेरे घर मै
खुशी मनाई।
अहे मैनै नींद …।
पाचवीं सेवा पति अपने की।
अहे उकी खावु रोज कमाई मै फुली
नहीं समाई।
अहे मैनै नींद …।
छठी सेवा गुरु अपने की।
अहे उनै ह्रदय मै ज्योत जलाई मेरी
नैया पार लगाई।
अहे मैनै नींद …।
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