
भजन के बारे में
हरियाणवी बालाजी भजन — एक दुखी बहू मेहंदीपुर बालाजी के दरबार में अपना दुख सुनाती है कि ससुराल वाले उसे बांझ कहकर ताने देते हैं, और बाबा से संकट काटने व गोद भरने की विनती करती है।
कब गाया जाता है: मंगलवार-शनिवार, मेहंदीपुर बालाजी यात्रा और हनुमान जयंती पर।
मुखड़ा (Hinglish): Ho ho Balaji mera sankat kaato na, ho idhar udhar na dol raha, mere dil ne daato na.
भजन के बोल
हो हो बालाजी मेरा संकट काटो ना
हो इधर उधर न डोल रहया,
मेरे दिल ने डाटो न,
हो हो बालाजी …।
तेरे भवन प आगी बाबा दया करो न मेरे पै
तेरे चरणां में शीश नवाऊँ धज्जा चढ़ाऊँ तेरे पै।
दुर दुर तं दुखिया आवं मेंहदीपुर डेरे पै।
तेरे चरणां में आण पड़ी मेरा साटा साधो ना
हो हो बालाजी …।
सासु जी भी न्युं बोली तुं बिल्कुल बांझ लुगाई स।
आपणे पीहर चाली जा आड़ै के तेरी असनाई स।
छोटा देवर न्युं बोला या छलिया घणी लुगाई स।
घर तं बेघर करण लाग रहे दुख ने काटो ना
हो हो बालाजी …।
तेरे भवन प आगी बाबा गोद भरा क जाऊँगी।
मेरी कामना पुरी करदे फेर भवन प आऊँगी।
यो अहसान मेरे प करदे दुनिया में गुण गाऊँगी।
ताने सुण सुण रूप बिगड़ गया रंग ने छाटो ना ।
हो हो बालाजी …।
कह मुरारी तेरे भवन का दुनिया के महां बैरा सै।
दुख चिंता में शरीर पड़ा यो चारों ओर अँधेरा सै।
और जुल्म मै सहन ना सकती इतणा कष्ट भतेरा सै।
जै कोये खता होई मेरे तं बेसक नाटो ना।
हो हो बालाजी …।
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