कहे बंशी सुनो राधे रानी।

मेरे मन कि किसी ने ना जानी।

मै हरी भरी जंगल मे खड़ी।

जब आरी से मुझको कटवाया।

कहे बंशी …।मेरे मन…।

मरवाया बसौला बढई से।

मेरे अंग अंग को छिलवाया।

कहे बंशी …।मेरे मन…।

मरवाई सरिया लोहे कि।

मेरे अंग अंग को छीदवाया।

कहे बंशी …।मेरे मन…।

बनवाई गाटक लोहे कि।

मेरे मुख के अन्दर ठुकवाई।

कहे बंशी …।मेरे मन…।

मैंने बडे बडे दुख सहे राधे।

तब जाके प्रभु ने मुझे अपनाया।

कहे बंशी …।मेरे मन…।

Categories: Radha bhajan

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