
भजन के बारे में
हरियाणवी अंदाज़ का मज़ेदार कृष्ण भजन — एक जाटनी नंदलाला को चुनौती देती है कि तूने गुजरियों की चुनरी चुराई, दही बिखेरा और माखन खाया, पर मैं हरियाणे की जाटनी हूँ — मेरी मटकी और चुनरी को हाथ तो लगाकर दिखा!
कब गाया जाता है: जन्माष्टमी, होली और महिला कीर्तन में।
मुखड़ा (Hinglish): Tu Gokul ka Nandlaala, main Jaatni Haryaane ki, main haath nahi aane ki.
भजन के बोल
तु गोकुल का नन्दलाला मै जाटनी हरियाणे की।
मै जाटनी हरियाणे कि मै हाथ नहीं आने कि।
तु गोकुल का…।
गुजरिया कि चुनरी चुराई।
मेरी चुनरी कै हाथ तो लगा मै जाटनी हरियाणे कि।
तु गोकुल का…।
गुजरिया का दही बखेरै।
मेरी मटकी कै हाथ तो लगा मै जाटनी हरियाणे कि।
मै जाटनी हरियाणे…।तु गोकुल का…।
गुजरिया का माखन खाया।
मेरी घीलड़ी कै हाथ तो लगा मै जाटनी हरियाणे कि।
मै जाटनी हरियाणे…।तु गोकुल का…।
गुजरिया कि पकड़ी कलाई।
मेरी उंगली कै हाथ तो लगा मै जाटनी हरियाणे कि।
मै जाटनी हरियाणे…।तु गोकुल का…।
गुजरियो के बछड़े चराए।
मेरे कटड़े कै हाथ तो लगा मै जाटनी हरियाणे कि।
मै जाटनी हरियाणे…।तु गोकुल का…।
सब सखियों को बंशी पै नचावै।
मेरै संग तु नाच के दिखा मै जाटनी हरियाणे कि।
मै जाटनी हरियाणे…।तु गोकुल का…।
सब सखियों से नैन लड़ाए।
मेरे संग नैन लड़ा के दिखा मै जाटनी हरियाणे कि।
मै जाटनी हरियाणे…।तु गोकुल का…।
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