जब से सती ने छोड़ा शिव का ठिकाना,

भूल गए भोले बाबा डमरू बजाना।

मेरे पिता ने यज्ञ रचाया ।

सबको बुलाया पर,हमें ना बुलाया।

जाऊँगी जरूर मैंने दिल में है ठाना,।

भूल गए भोले बाबा डमरू बजाना।

जब से सती…।

बिना बुलाए जाते नहीं हैं ।

जाते हैं तो मान पाते नहीं हैं।

जाऊंगी जरुर चाहे पड़े पछताना।

भूल गए भोले बाबा,डमरू बजाना।

जब से सती…।

सब देवों के आसन लगे हैं ।

मेरे पती का कोई,आसन नहीं है।

अग्नि मे जलुंगी ये मैंने मन में है ठाना,

भूल गए भोले बाबा डमरू बजाना।

जब से सती…।

कैलाश पर्वत पे शोर हुआ है ।

भोलेबाबा को बड़ा क्रोध हुआ है।

चले है वहाँ से जैसे पवन समाना,

भूल गए भोले बाबा डमरू बजाना।

जब से सती…।

जहाँ जहाँ सती के अंग गिरे हैं।

वहाँ वहाँ सुन्दर भवन बने हैं।

चरणों में झुकता ये सारा जमाना,

भूल गए भोले बाबा डमरू बजाना।

जब से सती…।

नैन गिरे वहाँ नैना देवी है।

 मन गिरा वहाँ मनसा देवी।

चिंतपूरणी का क्या है नजरा।

भूल गए भोले बाबा डमरू बजाना।

जब से सती …।

Categories: Shiv bhajan

0 Comments

Leave a Reply

Avatar placeholder

Your email address will not be published. Required fields are marked *