
अँगूठी मोय साँच बतादे कहाँ पर छोडे लक्ष्मण राम।
एक दिन अवधपुरी दरबार।
मार दए कैकेयी ने सब मान।
वचन को निभाने वाले कहाँ पर छोड़े लछमन राम।
अँगूठी मोहे…।
एक दिन जनकपुरी दरबार।
मार दिए सब भूपन के मान।
धनुष को तोड़नवाले कहाँ पर छोड़े लछमन राम।
अँगूठी मोहे…।
एक दिन चित्रकूट विश्राम।
मिला दिया सब भाईयों के मेल।
भाईयों मे बैठैन वाले कहाँ परछोड़े लछमन राम।
अँगूठी मोहे …।
एक दिन पंचवटी विश्राम।
मार दिया खरदूषण बलवान।
मृग को मारन वाले कहाँ पर छोड़े लछमन राम।
अँगूठी मोहे…।
एक दिन लंका मै विश्राम।
जला दिया सोने का दरबार।
रावण को मारन वाले कहाँ पर छोडे लक्ष्मण राम।
अंगुठी मोहे…।
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