पार्वती तेरा भोला जगत मे सबसे निराला है।

जो मै होती गंगा जैसी ।

जुड़े मे जाए समाती पति तो तेरा सबसे निराला है।

पार्वती तेरा…।

जो मै होती चंदा जैसी।

माथे पर जाए समाती पति तो तेरा सबसे निराला है।

पार्वती…।

जो मै होती नागों जैसी।

गले मे जाए समाती पति तो तेरा सबसे निराला है।

पार्वती…।

जो मै होती डमरु जैसी।

हाथो मे जाए समाती पति तो तेरा सबसे निराला है।

पार्वती…।

जो मै होती गणपत जैसी।

गोदी मे जाए समाती पति तो तेरा सबसे निराला है।

पार्वती…।

जो मै होती गौरा जैसी।

बगल मे जाए समाती पति तो तेरा सबसे निराला है।

पार्वती…।

जो मै होती नन्दी जैसी।

चरणों मे जाए समाती पति तो तेरा सबसे निराला है।

पार्वती…।

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Categories: Shiv bhajan

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