
बिहारी घर मेरा ब्रज मे बना दोगे तो क्या होगा।
मुझे भी बासुरी की धुन सुना दोगे तो क्या होगा।
कभी तुम सामने आए कभी तुम हो गए
ओझल।ये परदा बीच का प्रभु जी हटा दोगे तो क्या होगा।
बिहारी घर…।
मेरे नटवर मेरे नागर मेरे गोपाल गिरधारी।
मुझे भी गोपियों के बीच मिला दोगे तो क्या होगा।
बिहारी घर…।
सुना था वृन्दावन जाकर के दावानल बुझाई थी।
ये अग्नि मेरे ह्रदय की बुझा दोगे तो क्या होगा।
बिहारी घर…।
मै निशदिन सोचती रहती तुम्हारे पास आने को।
ये रस्ता आपका प्रभु जी दिखा दोगे तो क्या होगा।
बिहारी घर…।
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