रे क्या तन माजंता रे एक दिन माटी मे मिल जाना।

माटी मे मिल जाना एक दिन माटी मे मिल जाना।

रे क्या तन…।

माटी ओढ़न माटी बिछावन माटी का सिरहाना।

माटी का कलबूत बना है जिसमें भंवर भुलाना।

रे क्या तन…।

माटी मे मिल…।

रे क्या तन…।

एक दिन दुल्हा बना बराती बाजे ढोल निशाना।

एक दिन जा जंगल मे डेरा कर सीधे पग जाना।

रे क्या तन…।

माटी मे…।

रे क्या तन…।

मात-पिता का कहना मानो उनका हुकम बजाना।

सत्य वचन और रही दीनता उनको सुख पहुँचाना।

रे क्या तन…।

माटी मे…।

रे क्या तन…।

हरि की भक्ति कभी नहीं भूलो जो चाहो कल्याना।

सबका स्वामी पालन करता उसका हुकम बजाना।

रे क्या तन…।

माटी मे…।

रे क्या तन…।

Categories: Ram bhajan

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