
भजन के बारे में
कृष्ण की बांसुरी पर भजन — भक्त पूछता है कि बाँस के एक टुकड़े में गिरधारी ने ऐसा क्या देखा कि मुरली हमेशा साथ रखते हैं। भजन में मुरली के त्याग — अंग कटवाने और गरम सलाखों से छेद करवाने — का भी सुंदर भाव है।
कब गाया जाता है: जन्माष्टमी और कृष्ण कीर्तन में।
मुखड़ा (Hinglish): Aisa kya jaadu kar daala murli jaadugaari ne, kis kaaran se sang mein murli rakhi hai Girdhaari ne.
भजन के बोल
ऐसा क्या जादू कर डाला मुरली जादुगारी ने।
किस कारण से संग मे मुरली रखी है गिरधारी ने।
बांस के एक टुकड़े मे ऐसा क्या देखा बनवारी ने ।
किस कारण…।
कभी हाथ मे कभी कमर मे कभी अधर पे सजती है
मोहन कि सासों कि थिरकन से पल ये मे बजती है ।
काहे इतना मान दिया है बंशी को गिरधारी ने।
किस कारण…।
एक पल मुरली दूर नही क्यो सावरिये के हाथो से
रास नहीं रचता इसके बिन क्यों पुनम कि रातों मे
काहे को सौतन कह डाला इसको राधे रानी ने।
किस कारण…।
अपने कुल से अलग हुई और अंग अंग कटवाया है
गरम सलाखो से इसने है रोम रोम बिधवाया है।
तब जाकर ये मान दिया है बंशी को कृष्ण मुरारी ने।
इस कारण से संग मे मुरली रखी है गिरधारी ने।
त्याग तपस्या क्या है सुरज ये मुरली समझाती है।
प्रेम करो मुरली के जैसा कान्हा हर पल साथी है।
सच्चे प्रेम को ढ़ुढ़ंता रहता मोहन दुनिया सारी मे।
ये कारण है संग मे मुरली रखी है गिरधारी ने।
बांस के एक टुकड़े मे ऐसा क्या देखा बनवारी ने ।
किस कारण…।
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