
बाहन जाडा का महिना बहूड़ नै पाय दई खाटी छाए।
बाहन मेर खासी हो गई कोठी मै दिया हमने थुक ।
बाहन मैने बोली भोड़िया कोठी का कर दिया सत्यानाश।
बुढली घेरा मै चली जा घेरा मै घालो अपनी खाट ।
बाहन घेरा मै आई सिर पै तो धर लई अपनी खाट।
बाहन मेरा बुढा बोला किस विध ठाई खटिया आज।
बुढा हो जाडा का महिना बहुड़ नै पाय दई खाटी छाए ।
बुढा हो मेरै खासी हो गई कोठी मै दिया हमने थुक।
बुढा हो मेरी बोली भोड़िया कोठी कर दिया सत्यानाश।
बुढली घेरा मै चली जा इस विध ठाई हमने खाट ।
बुढली घरनै चालो हमनें भी करनी दोए बात।
बेटा हो मेरा आजा बाहरनै तेरा तै करनी दोए बात।
बेटा हो कोठी नै बेचु कोठी बनाई अपने आप।
बेटा हो घेरा नै बेचू डांगर करदू बारह बाट ।
बेटा हो कोठी मै धोउ फेर घलाऊ अपनी खाट।
बाहन मेरा बेटा बोला मेरी भी सुन ले बापू बात ।
बापू हो कोठी मै सोवो हथेली पै ओटू तेरा थुक।
बाहन मेरी बोली भोड़िया मेरी भी सुन ले बुढली बात ।
बुढी ऐ तैने हलवा खुवाऊ सेवा करुंगी दिन रात ।
बाहन जिसका कोए भी कोन्या उसका तो सऐ भगवान ।
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