
बार-बार मै तुझे पुकारु आजा पवन कुमार,तेरे बिना बजंरग जग मे ना कोई हमार।तेरे बिना…।
शंकर के अवतार राम के प्यारे हो-प्यारे हो।शरण मे आये के तुम्ही
रखवारे हो-रखवारे हो।दास तुम्हारी शरण मेआये करना बेड़ा
पार तेरे बिना…।
द्रोणागिरी से तुम ही बुटी लाये हो-लाये हो।बुटी ला लक्ष्मण के प्राण बचाये हो-बचाये हो।राम लखन को वापस लाए अहिरावण
को मार तेरे बिना …।
तेरे मन्दिर कि शोभा अजब निराली है-निराली है।दूर-दूर से दर्शन करने आते सब नर नारी है-नारी है।लाल-लाल सुन्दर छवि चमके
गले विराजे हार तेरे बिना…।
दीनदयाल बजंरगी मै आया शरण तेरी-शरण तेरी।शरण पड़े कि लाज राख लो सुध मेरी-सुध मेरी।तेरे दर को छोड के बाबा जाऊँ
मै किस द्वार तेरे बिना…।
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