
भजन के बारे में
यह भजन सिखाता है कि हर पूजा की शुरुआत आदि गणेश को मनाकर करें और फिर भोलेनाथ के दर्शन करें। साथ में शिव जी के रूप — जटाओं में गंगा की धारा, माथे पर चाँद, नीलकंठ, अंग पर भभूत और गले में सर्पों की माला — का सुंदर वर्णन है।
कब गाया जाता है: कीर्तन की शुरुआत में, सावन और महाशिवरात्रि पर।
मुखड़ा (Hinglish): Pehle Aadi Ganesh manaaya karo, phir Bhole ji ke darshan paaya karo.
भजन के बोल
पहले आदि गणेश मनाया करो फिर भोलेजी के दर्शन पाया करो।
भोले अद्भभुत तेरी माया है।कहीं धूप कहीं पे छाया है।
जंगल मे मंगल छाया है।
पहले आदि…।
भोले शीश गंग कि धारा है।माथे पे चांद उजियारा है।
वो नीलकण्ठ कहलाते है।
पहले आदि…।
भोले अंग भभूति रमाई हुई है।गले सर्पों कि माला पाई हुई है।
गौरा पार्वती संग आई हुई है।
पहले आदि…।
जो आदि गणेश मनाते है।उनके काम सफल हो जाते है।
हाथ जोड़ फूल बरसाया करो।
पहले आदि…।
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