
सोने की पड़ै फुहार फुहार जब कृष्ण
भात भरन लागया।
हरनन्दी कै भाई कोन्या।
और कोई असनाई कोन्या।
नरसी बना फकीर फकीर जब कृष्ण
भात भरन लागया।
सोने की पड़ै💐💐💐💐💐💐💐।
हरनन्दी रोवै बैठी बैठी।
नैनों से या नीर बहावै।
हरनन्दी घनी लाचार लाचार जब कृष्ण
भात भरन लागया।
सोने की पड़ै💐💐💐💐💐💐💐।
सिरसागढ का देख नजारा।
सिरसागढ मै हुआ चमत्कारा।
या दिन की बना दई रात हो रात जब
कृष्ण भात भरन लागया।
सोने की पड़ै💐💐💐💐💐💐💐।
सवा पहर बरसा मोहर अशरफी।
थम ठा लो नर और नार जब कृष्ण
भात भरन लागया।
सोने की पड़ै💐💐💐💐💐💐💐।
सवा पहर बरसा शाल दुशाला।
थम ठा लो ननद और सास हो सास
जब कृष्ण भात भरन लागया।
सोने की पड़ै💐💐💐💐💐💐💐।
सवा पहर या चुनरी बरसी।
थम ठा लो सारी बाहन
जब कृष्ण भात भरन लागया।
सोने की पड़ै💐💐💐💐💐💐💐।
समधन ठावै दौड़ दौड़ के।
समधी जी खड़ा हाथ जोड़ के।
हसं रहे कृष्ण मुरार मुरार जब कृष्ण
भात भरन लागया।
सोने की पड़ै💐💐💐💐💐💐💐।
हरनन्दी धोरै आए मुरारी।
म्हारी बाहन चलने की तैयारी।
इस भाई नै रखियो याद हो याद
जब कृष्ण भात भरन लागया।
सोने की पड़ै💐💐💐💐💐💐💐।
0 Comments