
पुरणमासी की रैन गवाई सतसंग मै
सतगुरु पकड़ो हाथ डबोई हरा रंग मै।
पकड़ आम की डाल सुहागन क्यो खड़ी
के तेरो पीहर दूर के तेरी सास बुरी।
ना मेरो पीहर दूर के ना मेरी सास बुरी
राम गया बनवास संदेशा लिया खड़ी।
सिर पै मटकी मेल राम तै मिलन गई
कव्वा मारी टाच मटकियां रीपट पड़ी।
अरै कव्वा मै तेरो के लियो तै मेरै मारी
टाच मटकियां रीपट पड़ी।
आग बुझी मत जान अंगारों आंच मै
भगत बनयो मत जान के चुगली साथ मै।
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