एक दिन राधा रानी पीहर गई थी।

तो माता नै अंगिया सिमाई मेरे रामा।

ओड़ै जोड़ै शीशे लगवाए।

तो बीच मै मोती जड़वाए मेरे रामा।

अंगिया पहर राधा सखियां मै आई।

तो सखियां नै खूब सराही मेरे रामा।

अंगिया पहर राधा सासरे मै आई।

तो सासु जी नै बहुत सराही मेरे रामा।

अंगिया पहर राधा महला मै आई।

तो कृष्ण जी नै बहुत सराही मेरे रामा।

राधा रै कृष्ण सोवन लागे।

तो कर लई बंद किवाड़ी मेरे रामा।

अंगिया तार राधा खुटी कै टांगी।

तो सो गई पिलंग निवारी मेरे रामा।

राधा प्यारी तो पड़के सो गई।

तो कृष्ण नै निंदिया ना आई मेरे रामा।

मन ही मन मै सोचन लागया।

या अंगिया गुजरी नै देऊ मेरे रामा।

राधा रै गुजरी की होवैगी लड़ाई।

तो हम भी तमाशा देखा मेरे रामा।

आधी रात शिखर मै हिरनी।

तो कृष्ण नै गुजरी जगाई मेरे रामा।

उठो हे गुजरी खोलो हे किवाड़ी।

तो तेरे लिए अंगिया लाया मेरे रामा।

दे अंगिया कृष्ण घरनै आ गया।

तो नींद गजब की आई मेरे रामा।

दिन निकला जब हुआ हे सवेरा।

तो राधा नै अंगिया ना पाई मेरे रामा।

ऊठो कृष्ण जी अंगिया ढुंढवाओ।

तो खुटी कै अंगिया ना पाई मेरे रामा।

हमने तो हे राधा बेरा कोन्या।

नींद जोर की आई मेरे रामा।

हम तो हे पड़ते ही सो गए।

तो थारे ऊठाए ऊठै मेरे रामा।

मेरा मन कहवै राधा ऐसा लागै।

तो अंगिया नै बान्दर ले गए मेरे रामा।

म्हारे कमरे की बंद किवाड़ी।

तो बान्दर कैसे आया मेरे रामा।

मेरा मन कहवै राधा ऐसा लागै।

के अंगिया नै चूहा ले गया मेरे रामा।

सारे महल के बिल खुदवाए।

के अंगिया कितै भी ना पाई मेरे रामा।

थारी माया कृष्ण थम ही जानो।

के दो दिन भी ना पहरी मेरे रामा।

चालो कृष्ण जी बाबा धोरै चाला।

के वो म्हारा न्याय चुकावै मेरे रामा।

बारह हे वर्ष उसकी गाय चराई।

तो इब कैसे चोर बतावै मेरे रामा।

चालो कृष्ण जी माता धोरै चाला।

के वो म्हारा न्याय चुकावै मेरे रामा।

छाती पाड़ के दूध पिलाया।

तो इब कैसे चोर बतावै मेरे रामा।

जाओ हे राधा पानी भर लयाओ।

तो अंगिया और सीमा दया मेरे रामा।

ठाके टोकनी हे पानी नै चाली ।

तो आगे तै गुजरी आवै मेरे रामा।

साचम साच बता दे हे गुजरी।

या अंगिया कहा से लयाई मेरे रामा।

साचम साच बता दु हे राधा।

या अंगिया जयपुर तै मंगाई मेरे रामा।

राधा कहवै या अंगिया मेरी।

या गुजरी कहवै हे अंगिया मेरी हो रामा।

राधा रै गुजरी की होई हे लड़ाई।

यो कृष्ण देखै तमाशा मेरे रामा।

देदो हे गुजरी राधा की अंगिया।

थारी और सीमा दया मेरे रामा।

ले अंगिया राधा घरनै आ गई।

मन मै खुशी मनाई मेरे रामा।

जो राधा की अंगिया गावै।

परम धाम मै जावै मेरे रामा।

कन्या गावै घर वर पावै।

तो बांझन पुत्र खिलावै मेरे रामा।

बुढिया गावै यमुना नहावै।

तो सीधी स्वर्ग मै जावै मेरे रामा।

हम गावा हे सारी बाहना नै सुनावा।

तो सीधी स्वर्ग मै जावा मेरे रामा।


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